तू भी तो कभी मुझ को मनाने के लिए आ,
कुछ बात भी कर दिल को बहलाने के लिए आ।
ये रात भी पूछे है तेरा नाम मेरे संग,
तू चाँद बनकर मुझको जगाने के लिए आ।
तू दूर सही दिल से मगर दूर नहीं है,
ये फ़ासला आकर तू मिटाने के लिए आ।
मैं हार चुका हूँ तेरे जाने के ग़मों से,
तू जीत का एहसास दिलाने के लिए आ।
ये आँसू जो ठहरे हैं पलकों पे मेरे अब,
तू हँसी बनकर इन्हें सुखाने के लिए आ।
बस एक दफ़ा आके गले से तो लगा ले,
तू प्यार को फिर से निभाने के लिए आ।
